कमरे के ऊँचे कोने पर
एक गंदला,छोटा
'जंगला' अनदेखा छूट गया है,
शायद कमरे में
रौशनी सबसे पहले
उसी से आया करती है,
फिर उपेक्षित ?
क्यूंकि उससे झांक नहीं सकते,
किसी को,कुछ भी ताक नही सकते
वो खिड़की नहीं है
शायद इसलिये |
फिर मौजूद क्यूँ है ?
जरूर
हमारे सपनों के कमरे का नज़रबट्टू ही होगा
पता नहीं किस बेवकूफ परिंदे ने उस पर
अपना घरौंदा बना लिया है,
शायद उसने
उसे अपना झरोखा मान लिया है |
एक गंदला,छोटा
'जंगला' अनदेखा छूट गया है,
शायद कमरे में
रौशनी सबसे पहले
उसी से आया करती है,
फिर उपेक्षित ?
क्यूंकि उससे झांक नहीं सकते,
किसी को,कुछ भी ताक नही सकते
वो खिड़की नहीं है
शायद इसलिये |
फिर मौजूद क्यूँ है ?
जरूर
हमारे सपनों के कमरे का नज़रबट्टू ही होगा
पता नहीं किस बेवकूफ परिंदे ने उस पर
अपना घरौंदा बना लिया है,
शायद उसने
उसे अपना झरोखा मान लिया है |
Nadan Parindey..... Very Nice really...
ReplyDeletewo zarokha upekchit lagta zaroor he pr wo he nhe us pakshi ke nazar se dekho uska mahtwa,ase hee hmare zindagi hote he kae cheeze hote he jinka mahtwa smjh nhe aata pr jab koi pakshe uspe apna ghosla bana leta he aur hum use kho dete he tb hme uska mahtwa samjh aata
ReplyDeletevare maulana keep it up but change your photo
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