Saturday, November 26, 2011

क्षणिकाएँ


कर्तव्य
हुई भोर
झींगुर का शोर,
अलसाई आखें लिए
"चल घर चलें अब"
कहता है बार बार,
गाँव का चौकीदार.........

प्रश्न 
 फिर बरस गया चितचोर,
प्रियतम चंद्रमा,
तू भी दूर....
जंगल नाचा मोर,
आद्र नयन कोर,
किसने देखा ?

उत्तर
श्याम आये,
सावन लिए
मेह बरसे नयन भी,
हुई दूर कुरूपता
संसार से भी मन से भी....


आशाएँ
दो घरौंदे
पड़ौसी,
ये वो है 
कभी वो ये होता है,
कभी एक की चटनी
तो दूजे की खीर हो,
चाहे असंख्य बाधाएं
पर राह के उस पार हैं,
दोनों की आशाएँ
दोनों समान्तर रेखाएं...

Tuesday, November 22, 2011

मंथन

क्यूँ अचानक
हो रहा कितने विचारों
का समागम ,अंगुठन,
आह ! खोता जा रहा
अंतः हृदय का सन्तुलन,

हो रहीं अज्ञात सी
सब इन्द्रियां ,ज्ञानेन्द्रियाँ ,
क्या स्वयं का है पतन ?
या कोई अग्नि-प्रज्वलन,

होम होता जा रहा सब
चाहे शिथिल हो सख्त हो,
हों विसर्जित अवशेष भी
पूर्ण हो अब भ्रान्ति-तर्पण,

हो हलाहल पान अब
शिव समर्पण,अनुकरण,
प्रारब्ध हो उत्थान अब
आरम्भ हो गंभीर चिंतन !

शिव ही दिखे हर प्राण में
शिव हो सत्यम ,सुन्दरम ,
विश्वास की प्रस्तर शिला पे
है सभी का आवहन,है सभी का आवहन,है सभी का आवहन....

Monday, November 21, 2011

आशा पाती


घिर आया घनघोर सघन मन, 
उत्प्लावित अपार जलराशि 
होता राज्य तिमिर का विस्तरित,
नयन ज्योति अन्धराई जाती 

विश्व हृदय तम से आच्छादित,
शंका चपल तड़ित सी आती
दृश्य भयावह भीषण प्रस्तुत,
हृदय गति पथराई जाती

व्यथित, दुखित यात्री मन संचित,
चीत्कार भर्राई आती 
हाय ! प्रलयंकारी विपदा यह,
शुष्क शिराओं को कर जाती
 
फिर भी एक पुंज प्रकाशित ,
आशा जिसकी अभिलाषी
नव चेतन पल्लवित करती ,
इंदु प्रेषित आशा पाती... ..

INTRODUCTION(परिचय)

As the name suggests ABHIVYAKTI(अभिव्यक्ति)-means to 'Express'.
To express freely what we feel,what we see,what we want,our expectations,complaints,anger,love,anything or everything .So this is the place where you will find the variety of expressions .This is a small step i have taken to express myself and the things which are close to my heart.I seek your valuable support,comments and suggestion.Feel free to write to me if you want to share your thoughts and expressions.


अभिव्यक्ति - अर्थात उन विचारों का सम्प्रेषण जो प्रत्येक व्यक्ति के व्यक्तित्व के कारण,स्वाभाव के कारण अनायास ही व्यक्त हो जाते हैं |
हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी में न जाने कितने ही भाव,विचार, संवेदनाएँ आते-जाते रहते हैं और हमारी व्यस्तता के चक्रव्यूह में कितने ही गंभीर चिंतन यूँ ही लोप हो जाते हैं | अभिव्यक्ति एक छोटा सा व्यक्तिगत प्रयास है| आपके सुझाव ,विचार और टिप्पणीयाँ सादर आमंत्रित हैं |