"लोल"
"मुखपुस्तिका"(फेसबुक)में "स्टेट्स" चेपते हुए
परायी "दीवारों" को देखते हुए
मन बार बार जा अटका
नज़रों में हर मर्तबा खटका
एक ही बोल
"लोल" ....?
अजी ये क्या बला है?,दिमाग चकराया
हमने फटाफट शब्दकोश खंगराया
अंग्रेजी साहित्य भी उठाई
पर "लोल" की पोल नहीं पाई
रात भर सो नहीं पाया
जब सुबह दुखड़ा मित्रों को सुनाया
उन्होंने ने ऐसी खिल्ली उड़ाई
हमे शेख चिल्ली की उपाधि पकड़ाई
किसी तरह उन्होंने
हँसी को जब्त किया
हमारे अज्ञान पे दो मिनट
का मौन व्यक्त किया
फिर बोले, अरे बौडम!
ये आधुनिक हास्य का पर्याय है
हँसी का तथाकथित उपाय है
हर समस्या के समाधान का
गोल-गोल अभिप्राय है, लोल
अब बोल
हम बोले तो हा-हा में क्या दिक्कत है?
वो तो हमारी पुरानी आदत है
हमारी सांस्कृतिक विरासत है
उससे तुम्हे क्यों अदावत है ?
बोले ,तुम्हे तो 'क्रिटिक' होना चाहिए
लगता है तुम्हे 'डिप्लोमेटिक' उत्तर चाहिए
देखो ,हा-हा बड़ा ही 'औड' है
"लोल" का कांसेप्ट ज़रा 'ब्रौड' है
क्या आप कभी बहुवचन में हँसे हैं ?
क्या हँसने की 'फील' में घुसे हैं
"लोल्ज़" में यह सब 'पोसिबल' है
हँसने के साथ साथ हमारी सोच का
दोगलापन भी "अप्लोसिबल" है
"लोल" सर्वस्व है व्यापक है
हमारी प्रगति का मापक है
तो इसकी माहिमा को स्वीकार कीजिए
और अपनी आधुनिता का विस्तार किजिए |
LOLzzzzzzz......
ReplyDeletewell i'll take that as compliment ...thanx..
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